उत्तर प्रदेश

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी, नरौरा बैराज पर खतरे के निशान के करीब पहुंचा पानी

Kavita2
1 Aug 2026 11:24 AM IST
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी, नरौरा बैराज पर खतरे के निशान के करीब पहुंचा पानी
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बुलंदशहर। पहाड़ी इलाकों में हुई भारी बारिश का असर अब मैदानी क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और नदी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। नरौरा बैराज पर बढ़ता जलस्तर और लगातार बढ़ रहा डिस्चार्ज आने वाले दिनों में जलस्तर और बढ़ने के संकेत दे रहा है।

राजघाट क्षेत्र में भी गंगा का पानी तेजी से बढ़ा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी मंदिरों की दहलीज तक पहुंच गया है। इससे तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और सिंचाई विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार शाम चार बजे से शनिवार सुबह छह बजे तक नरौरा बैराज पर गंगा का जलस्तर 178.36 मीटर से बढ़कर 178.37 मीटर दर्ज किया गया। भले ही जलस्तर में बढ़ोतरी केवल एक सेंटीमीटर रही, लेकिन नदी में पानी के प्रवाह में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

इस दौरान बैराज से छोड़े जा रहे पानी का डिस्चार्ज भी बढ़ा है। शुक्रवार शाम को जहां डिस्चार्ज 1,67,951 क्यूसेक था, वहीं शनिवार सुबह यह बढ़कर 1,72,721 क्यूसेक पहुंच गया। बढ़ते डिस्चार्ज के कारण नदी के आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

वर्तमान में नरौरा बैराज पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 178.765 मीटर से केवल 39 सेंटीमीटर नीचे है। ऐसे में प्रशासन किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अधिकारियों का कहना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों से पानी का दबाव इसी तरह बना रहा तो आने वाले समय में जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है।

सिंचाई विभाग ने बैराज पर निगरानी बढ़ा दी है। कर्मचारियों को लगातार जलस्तर और डिस्चार्ज की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। नदी के प्रवाह में किसी भी अचानक बदलाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों में भी चिंता बढ़ने लगी है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग नदी के बढ़ते पानी पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।

राजघाट क्षेत्र में गंगा का पानी मंदिरों तक पहुंचने से स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। धार्मिक स्थलों के आसपास जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को भी सावधानी बरतने की जरूरत महसूस हो रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर कुछ समय बाद मैदानी इलाकों की नदियों पर दिखाई देता है। ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने के कारण गंगा का प्रवाह बढ़ जाता है। ऐसे में नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

प्रशासन ने निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को भी अलर्ट रहने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किए जा सकें।

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के पास जाने से बचें और बच्चों को भी नदी किनारे जाने से रोकें। नाव संचालन और अन्य गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। अधिकारियों का कहना है कि नदी के जलस्तर और बारिश की स्थिति के आधार पर आगे के कदम उठाए जाएंगे।

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है। आने वाले दिनों में ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी और मौसम की स्थिति पर ही यह निर्भर करेगा कि नदी का प्रवाह किस दिशा में बढ़ता है।

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